रमज़ान से जुड़े वो झूठ जिन्हें सच मानते हैं लोग....

भारत एक धर्म निरपेक्ष राष्ट्र है। यहाँ सभी धर्मो के लोग आपस मे प्रेम और सौहार्द के साथ रहते है। सभी धर्मो मे ईश्वर का नाम भले ही अलग-अलग हो परंतु सभी धर्मो का लक्ष्य एक ही है की समाज मे प्रेम और भाईचारे कि भावना जीवित रहे। इस्लामिककैलेंडर के अनुसार रमदान माह को सबसे पाक बताया गया है। इस्लामधर्मको मानने वाले लोगो के लिए रमज़ान का महिना बहुत ही पवित्र माना जाता है। जिसके अंतिम दिन को ईदगाह के रूप मे मनाते है। रमज़ान माह मे पूरे 1 महीने इस्लाम मानने वाले,दिन के समय रोज़ा रखते है। रोज़े का अपने आप मे बड़ा महत्व है। कहा जाता है की इन रोज़ेधारको पर खुदा की रहमत होती है। जिसे पूरे माह के दौरान तीन भागो मे बांटा गया है। जिसे रमज़ान माह का अशरा कहते है। अशरा का अर्थ होता है 10 दिन अर्थात पूरे महीने को 10-10 दिनो मे बाँट दिया जाता है। प्रथम दस दिन(1 से 10 ) मे रोज़े धारको पर खुदा अपनी रहमत बरसाता है। द्वितीय 10 दिन (11 से 20) मे खुदा मनुष्य द्वारा किए गए पापो का नाश करता है जिसे मगफिरतकहते है जबकि अंतिम 10 दिन (20 से 29 या 30 दिन) रोज़े धारण करने से खुदा इंसान को जहन्नुम यानि नर्क की आग से बचाता है।

मनाए जाने का कारण

कहा जाता है कि रमज़ान माह मे ही अल्लाह ने अपने बंदो को कुरान शरीफ से नवाजा था। खुदा का शुक्रिया अदा करने के लिए प्रत्येक इस्लाम मनाने वाले परिवारो मे रोज़े रखने की परंपरा है। जिसे घर का छोटे से बड़ा हर कोई बड़ी सिद्दत से निभाता है। जिसे खुदा की इबादत कहा गया है। रोज़े रखने कि भी एक निश्चित अवधि होती है। जिसमे सुबह सूर्य के उदित होने से पहले कुछ खाना होता हैजिसे शहरी कहते है। इसके पश्चात दिन भर मे और कुछ नही खाना होता है। सूर्य के अस्त होने के बाद ही रोज़े खोलने की इजाजत है। जिसे इफ्तार कहते है। रमजान माह के अंतिम दिन चाँद के दीदार होने के अनुसार ईद-उल-फितर मनाई जाती है।