अज्ञानता और मोहमाया ही मनुष्य के पतन का कारण बनती है

एक समय की बात है जब एक किसान एक जंगल में लकड़ी काटने गया था. वह लकड़ी काटते काटते जंगल में बहुत अंदर  चला गया था. अब धीरे धीरे शाम ढलने लगी थी और अँधेरे की चादर हर तरफ बिछनी शुरू हो गयी थी.  अंधेरा होते ही उस जंगल में खतरनाक जानवरों की आवाज आने लगी  जिससे कि वो किसान अपनी जान बचाकर वहां से उलटे पाँव भागने लगा.  अंधेरे में कुछ भी ना दिखने के कारण वह एक कुएं में जा गिरा जिसमें चार सांप उसको घात लगाए बैठे हुए थे. परंतु भाग्य का वह धनी किसान कुएं में ज्यों ही गिरा वृक्ष की एक शाखा उसके हाथ में आ गयी  जिसे पकड़ कर वो बहुत देर तक उसी पेड़ से लटका रहा.  वह मदद के लिए बहुत चिल्लाया परन्तु इस घने जंगल में उसकी मदद करता भी तो कौन??
तभी उसने देखा कि जिस वृक्ष की शाखा को उसने पकड़ रखा है उसे दो चूहे कुतुर रहे हैं. और जिस पेड़ की डाली को उसने पकड़ रखा था उसे एक हाथी अचानक से आकर है हिला हिला कर उखाड़ने में लगा है. 
वह बहुत परेशान हुआ उसे कुछ भी न समझ आ रहा था तभी उसने देखा की वृक्ष की शाखा पर  कुछ मधुमक्खियों ने छत्ते  बनाए हुए हैं जिससे  शहद की ये बूंदें नीचे टपक रही थी इन  गिरती हुई शहद की बूंदों को देख उसके मुंह में पानी आ गया और वह शहद को चाटने में लग गया.  अज्ञानतावश वह मनुष्य शहद को चाटने में इतना व्यस्त हो गया कि उसे अपने परिस्थितियों का अंदाजा भी नहीं रहा  कि वह इस समय कहां पर है.
तभी भगवान ने उसकी रक्षा हेतु अपना एक रथ भेजा परन्तु अज्ञानता में चूर वह मनुष्य मधुर शहद के  रस  पान में इतना व्यस्त हो गया कि उसने भगवान की भेजी मदद को भी  मना कर दिया जिससे की भगवान् अपना रथ लेकर वहां से लौट गए.
और वो व्यक्ति कुँए में गिर कर मगरमच्छो का शिकार बन गया.
अर्थात कहने का आशय यह है की वह जिस  जंगल से जा रहा था वह है दुनिया अर्थात संसार. अंधेरा है अज्ञानता,  पेड़ की डाली है उम्र,  जिसे दिन और रात के समान दो चूहे खाए जा रहे है, और घमंड अर्थात हाथी जो कि पेड़ कोउखाड़ने में लगा हुआ हैं   अब जहां तक शहद की बात है वह तो आप समझ ही गए होंगे इस संसार में व्याप्त  मोहमाया, काम,  वासना, सभी उस शहद के समान है जो मनुष्य को निरंतर पतन के रास्ते पर धकेलता ही जा रहा हैं.  अर्थात जिसमे पड़ने पर स्वयं भगवान् भी उसकी कोई सहायता नहीं कर पाते हैं.