बुद्ध पूर्णिमा 2020: इस तारीख को है बुद्ध पूर्णिमा, जानें इस दिन का महत्व

इस साल 2020 में भगवान बुद्ध की जयंती 7 मई दिन गुरुवार को मनाई जाएगी। बुद्ध पूर्णिमा प्रतिवर्ष वैशाख मास की पूर्णिमा तिथि को मनाई जाती है। एक राज्य का एक ऐसा राजा जिसने सभी तरह की सुख-सुविधाओं का त्याग करके आत्म ज्ञान प्राप्त कर बुद्धत्व की प्राप्ति कर सिद्धार्थ से भगवान बुद्ध बन गए। जानें बुद्ध पूर्णिमा का महत्व।

“बुद्धं शरणं गच्छामि

भारत एक धर्म निरपेक्ष राष्ट्र है जहां सभी धर्मो के लोग आपस मे प्रेम और सौहार्द के साथ मिल कर रहते है। हिन्दू, मुस्लिम, सिक्ख, ईसाई, पारसी, जैनी, औरबौद्ध सभी आपस मे मिल कर एक राष्ट्र का निर्माण करते है। इसमे सभी धर्मो के अनुसार प्रत्येक माह मे अनेकों व्रत एवं त्योहार पड़ते है। जिसे लोग अपनी-अपनी मान्यताओ के अनुसार मनाते है। बौद्ध धर्म के अनुयाइयों के लिए बुद्ध पुर्णिमा का अत्यंत महत्व है।कहा जाता है कि आज के दिन 563 ईशा पूर्व भगवान बुद्ध का जन्म हुआ था। सत्य की खोज मे जुटे महात्मा बुद्ध ने सभी सुख सुविधाओं का त्याग कर यहाँ तक की अपना गृहस्थ जीवन का भी कर दिया था और परम ज्ञान की प्राप्ति के लिए निकल पड़े थे।

महात्मा बुद्ध का बचपन –

महात्मा बुद्ध के बचपन का नाम सिद्धार्थ था। और इनके पिता राजा शुद्धोधन एक बड़ी रियासत के राजा थे। एक कथा के अनुसार जब सिद्धार्थ बाल्यकाल मे थे तो उनके पिता राजा शुद्धोधन को एक स्वपन आया जिसमे उनको सात दृश्य दिखाई पड़े जो की सिद्धार्थ के धार्मिक गुरु बनने की ओर इशारा कर रहे थे।

कहते है की समाधि कि आठ अवस्थाएँ होती है जिसे सिद्धार्थ ने प्राप्त कर लिया था। परंतु उनके जीवन का अंतिम लक्ष्य परम धर्म को पाने के लिए व्याकुल था। उनका मानना था कि अभी भी कुछ बाकी है जो कि मुझे प्राप्त करना है। इस लिए उन्होने“समाना” साधना का निश्चया किया। समाना”  साधक ऐसे साधक होते है कि जो भूख प्यास का त्याग कर लगातार चलते ही रहते है यहाँ तक कि जहां पर भी भोजन मिलने कि संभावना होती है वहाँ से वह अपना मार्ग बदल लेते है।इसी राह को अपना कर सिद्धार्थ भी परम ज्ञान को प्राप्त करने निकाल पड़े। बहुत दूर चलने के बाद 2 फूट गहरी निरांजना नदी ने उनका मार्ग अवरुद्ध किया। जिसे पार करने कि कोशिश सिद्धार्थ करते रहे। कुछ दूर नदी पार करने के बाद एक छोटी लकड़ी के सहारे गौतम न जाने कितनी ही देर खड़े रहे। शारीरिक दुर्बलता उन्हे एक कदम भी आगे बढ्ने नही दे रही थी। वो समय भले ही कुछ देर का रहा वो परंतु बुद्ध ने उसमे सदियों गुजारी होंगी। कुछ देर वहीं खड़े रहने के बाद न जाने कहाँ से उनके शरीर मे एक नई धारा का प्रवाह हुआ और उनमे नदी पार करने कि क्षमता उत्पन्न हुई। और उन्होने नदी पार कर वहीं एक वृक्ष के नीचे बैठ कर यह निश्चय किया कि अब मैं तब तक यहाँ बैठूँगा जब तक कि मुझे आत्म ज्ञान कि प्राप्ति नही हो जाती है। वह दिन पुर्णिमा का था और इसी अवस्था मे बैठे-बैठे समस्त आयामो मे जीने के बाद बुद्ध ने परम सिद्धियों को प्राप्त कर आत्मज्ञान कि प्राप्ति कि। और वहीं वृक्ष के नीचे परमानंद कि अवस्था मे बैठे रहे। जहां सिद्धार्थ गौतम बुद्ध काहलाये।

इन देशो मे भी मनाई जाती है बुद्ध पूर्णमा

विश्व भर मे भारत सहित बहुतेरे देशो मे बुद्ध के अनुयाई रहते है। जहां तक इनकी संख्या कि बात कि जाये तो सभी को मिलकर 180 करोड़ तक पहुँचती है। बुद्ध पुर्णिमा या बुद्ध जयंती को इन देशो मे विशेष रूप मे मनाया जाता है (भारत, चीन, नेपाल, श्रीलंका, सिंगापूर, वियतनाम, कंबोडिया, इंडोनशीय, मलेशिया और म्यांमार)। आज के दिन को विभिन्न देशो मे लोग बौद्ध मंदिरो मे जाकर भगवानबुद्ध कि महिमा का गुणगान करते है। भारत के बिहार राज्य मे स्थित गया मे आज के दिन भव्य आयोजन किया जाता है। घी के दिये जलाकर यह पर्व उत्सव कि भांति मनाया जाता है। आज के दिन देश-विदेश के हजारो बौद्ध अनुयाई इसका दीदार करने आते है।

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