Maggi lovers क्या आप जानते हैं 2 मिनट में बनने वाली मैगी का ये सच ?

मैगी हर किसी की पहली पसंद है। ऐसे हो भी क्यों न 2 मिनट में जो बन जाती है। आज दुनिया भर में सबसे ज्यादा खाई जाने वाली मैगी यानी कि टू मिनट नूडल्स के बारे में कुछ ऐसा बताने जा रहे हैं जिसे सुनकर पर हैरान हो जाएंगे।

आज जिसे आप भूख लगने पर बस 2 मिनट में बना लेते हैं इसके इतिहास के बारे में कुछ जातने हैं क्या आप जानते हैं कि मैगी के पीछे 123 साल की एक कहानी है। अगर नहीं तो कोई बात नहीं क्योंकि यहां आप अकेले नहीं है जो इसके इतिहास के बारे में नहीं जातना है। चलिए तो आज हम आपको बताते हैं कि मैगी के 123 के सफर की कहानी...
भारत में मैगी का आगमन 1983 में हुआ था जब इसे नेस्ले इंडिया लिमिटेड ने इसे भारतवासियों के लिए मैगी नूडल्स के नाम से लॉन्च किया था लेकिन भारत से पहले भी ये अन्य देशों में लोगों की लोकप्रिय बनी रही। सबसे पहले इस मैगी को 1897 में जर्मनी में पेश किया गया था। यहां पर भी इसे मैगी के नाम से ही पेश किया गया था।
जूलियस माइकल जोहानस मैगी
इस नाम के पीछे भी एक कहानी है। यही वो शख्स है जिसने हमारी लिए मैगी का इजात किया। सीधे- सीधे कहे तो मैगी बनाने का पूरा श्रेय जूलियस माइकल जोहानस जाता है। उन्हीं के नाम के बाद से हम मैगी को मैगी कहते हैं।

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कैसे बनी मैगी
जूलियस का जन्म स्विट्जरलैंड में हुआ था। वो ज्यादा अमीर नहीं थे वो आटे के बने प्रोडक्ट बनाकर बेचते थे लेकिन उनका ये बिजनेस सही नहीं चल रहा है। इसके बाद उन्होंने 1886 में सोचा कि वो कुछ ऐसा बनाएंगे जो कम वक्त में बन जाए जिससे लोग ज्यादा वक्त न होने पर भी बनाकर खा सकें।बस फिर जूलियस कुछ ऐसा ही बनाने में जुट गए और काफी मेहनत के बाद उन्हे सफलता मिली और उन्होंने मैगी बना ली।
पहले को मार्केट में मैगी को किसी ने पसंद नहीं किया लेकिन बाद में धीरे धीरे मैगी की अपनी एक अलग पहचान बन गई। जूलियस ने मैगी के अलावा भी कई तरह के फ्लेवर वाले सूप बाजार में उतारे थे और वो सारे काफी लोकप्रिय हुए थे। जिसके बाद इसे कई देशों में लॉन्च किया गया। उन्हीं देशों में भारत भी एक नाम था 1947 में इसे भारत में भी लॉन्च कर दिया गया और अब ये आपकी भी मनपसंद बन गई है।

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