Tarot Card: जानें क्या है टैरो कार्ड रीडिंग, कैसे हुई इसकी शुरुआत

टैरो कार्ड रीडिंग (Tarot Card Reading): राशिफल, जन्म कुंडली, हस्तरेखा और न्यूमरोलॉजी भविष्य जानने के लिए शायद आपने भी कभी ज्योतिष की इन विधाओं का इस्तेमाल किया होगा. लेकिन क्या आपने कभी भविष्य जानने के लिए टैरो कार्ड रीडिंग (Tarot Card Reading) का सहारा लिया है. टैरो कार्ड दिखने में काफी कुछ ताश के आम पत्तों की तरह होते हैं. लेकिन इनकी दुनिया काफी रहस्यमयी होती है. हाल में टैरो कार्ड रीडिंग काफी प्रचलन में है. जानकारी के अनुसार, 'टैरो' शब्द 'टैरोटी' से आया है इसका मतलब है कि कार्ड्स के पीछे दिखने वाली क्रॉस लाइन. टैरोची शब्द का कनेक्शन माइनर आर्काना के कार्ड से था.

कुल 78 टैरो कार्ड्स होते हैं, इन कार्ड्स को डेक कहा जाता है. कार्ड्स को मेजर आर्काना और माइनर आर्काना में बांटा गया है. आर्काना शब्द की उत्पत्ति लैटिन भाषा के शब्द 'आर्कान्स' से हुई है. इसका मतलब है रहस्यमय व्यक्तिगत विकास.

मेजर आर्काना कार्ड्स के पीछे कई बातें अगल-अलग चिन्हों में प्रतीकात्मक और गुप्त रूप से दर्ज होती हैं. इन प्रतीकात्मक चिन्हों को देख कर ही टैरो कार्ड रीडर व्यक्ति के भविष्य में घटने वाली घटनाओं का अनुमान लगाती है. लोगों के सवालों के जवाब टैरो कार्ड्स पार बने चिन्ह खुद-ब-खुद देते हैं. व्यक्ति जो टैरो कार्ड उठाता है उसी के अनुसार उसका भविष्य बताया जाता है.
बने होते हैं चिन्ह:


टैरो कार्ड पर कई अंक, रंग, संकेत के अलावा पृथ्वी, जल, अग्नि, वायु, आकाश और हवा जैसे तत्व बने होते हैं. इन्हीं के आधार पर टैरो कार्ड रीडर लोगों की भविष्य की व्याख्या करते हैं.

ऐसे शुरू हुआ टैरो कार्ड्स का प्रचलन:
टैरो कार्ड रीडिंग सबसे पहले चौदहवीं शताब्दी में इटली में मनोरंजन के तौर पर सामने आयी. लेकिन बहुत जल्द ही यह इतनी मशहूर हुई कि पूरे यूरोप के बहुत से देशों में फैल गई. आने वाले समय में इसने मनोरंजन का नहीं बल्कि भविष्य का बखान करने वाली एक रहस्मयी विद्या का रूप ले लिया. 18वीं शताब्दी आते-आते टैरो कार्ड रीडिंग इंग्लैंड व फ्रांस में भी काफी मशहूर हो गई. इसके अलावा यह भी माना जाता है कि टैरो कार्ड्स की फिलॉसफी कबाला से पैदा हुई है.

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